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mahabharat 12.222.d3: भीष्मजी बोले - राजन! शास्त्रों के पारंगत सभी महात्मा अपने-अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। इस संसार में ऐसे अनेक विद्वान हैं; किन्तु उनमें से कौन ऐसा विद्वान है जो वास्तव में सत्य को जानता है और कौन शास्त्रार्थ में पारंगत है? यह कहना कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  12.222.d3 
भीष्म उवाच
स्वे स्वे युक्ता महात्मान: शास्त्रेषु प्रभविष्णव:।
वर्तन्ते पण्डिता लोके को विद्वान् कश्च पण्डित:॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! शास्त्रों के पारंगत सभी महात्मा अपने-अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। इस संसार में ऐसे अनेक विद्वान हैं; किन्तु उनमें से कौन ऐसा विद्वान है जो वास्तव में सत्य को जानता है और कौन शास्त्रार्थ में पारंगत है? यह कहना कठिन है।
 
Bhishmaji said - King! All the great souls who are influential in the scriptures are steadfast in their own theories. There are many such scholars in this world; but who among them is a scholar who really knows the truth and who is a scholar in the discussion of scriptures? It is difficult to say.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)