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mahabharat 12.222.d25: (भीष्मजी कहते हैं—) तब उन ब्राह्मणों ने हाथ जोड़कर शुद्ध ज्ञान के परम ऋषि सनत्कुमार से कहा, हे महामुनि! हम ज्ञान के भण्डार और जगत के सर्वोत्तम स्वरूप भगवान की किस प्रकार पूजा करें?   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  12.222.d25 
तमब्रुवन् प्राञ्जलयो महामुनिं
द्विजोत्तमं ज्ञाननिधिं सुनिर्मलम्।
कथं वयं ज्ञाननिधिं वरेण्यं
यक्ष्यामहे विश्वरूपं कुमार॥
 
 
अनुवाद
(भीष्मजी कहते हैं—) तब उन ब्राह्मणों ने हाथ जोड़कर शुद्ध ज्ञान के परम ऋषि सनत्कुमार से कहा, हे महामुनि! हम ज्ञान के भण्डार और जगत के सर्वोत्तम स्वरूप भगवान की किस प्रकार पूजा करें?
 
(Bhishmaji says—) Then those Brahmins folded their hands and said to Sanatkumar, the supreme sage of pure knowledge, the great sage Sanatkumar! How should we worship God, the storehouse of knowledge and the best form of the world?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)