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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना
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श्लोक d18
श्लोक
12.222.d18
अथाह गम्भीरतरानुपादं
वाक्यं महात्मा ह्यशरीर आदि:।
न ते मुने श्रोत्रमुखेऽपि चास्यं
न पादहस्तौ प्रपदात्मकेन॥
अनुवाद
तब उस अदृश्य आदि-महात्मा ने गम्भीर स्वर में कहा - 'मुनि! आपके न तो कान हैं, न मुख, न हाथ, न पैर, न पैरों की उँगलियाँ।'
Then that invisible Adi-Mahatma said in a deep voice - 'Muni! You have neither ears, nor mouth, nor hands, nor legs, nor toes of the feet'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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