Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.d12-d13: तब भगवान नारद ने उन ब्राह्मणों से कहा, "हे ब्राह्मणों! मैं उस तत्त्व को नहीं जानता। चलो हम सब कहीं अन्यत्र चलें। इस संसार में ऐसा विद्वान कौन है जो आसक्ति से मुक्त हो और जो उस अद्भुत अमृत तत्त्व को समझाने में समर्थ हो?" | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहं द्विजा विजानामि क्व हि गच्छाम संगता:॥
इति तानाह भगवांस्तत: प्राह च स द्विजान्।
को विद्वानिह लोकेऽस्मिन्नमोहोऽमृतमद्भुतम्॥
अनुवाद
तब भगवान नारद ने उन ब्राह्मणों से कहा, "हे ब्राह्मणों! मैं उस तत्त्व को नहीं जानता। चलो हम सब कहीं अन्यत्र चलें। इस संसार में ऐसा विद्वान कौन है जो आसक्ति से मुक्त हो और जो उस अद्भुत अमृत तत्त्व को समझाने में समर्थ हो?"
Then Lord Narada said to those Brahmins, "O Brahmins! I do not know that principle. Let us all go somewhere else. Who is such a scholar in this world who is free from attachment and who is capable of explaining that wonderful Amrit principle?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥