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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना
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श्लोक 9
श्लोक
12.222.9
यै: कश्चित् सम्मतो लोके गुणै: स्यात् पुरुषो नृषु।
भवत्यनपगान् सर्वांस्तान् गुणाँल्लक्षयामहे॥ ९॥
अनुवाद
हे दैत्यराज! मैं इस संसार में उन सभी गुणों को, जो मनुष्य को सम्मान दिला सकते हैं, आपमें स्थिर अवस्था में विद्यमान देखता हूँ॥9॥
'Demon King! I see all those qualities in this world which can earn a man respect, present in you in a stable state.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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