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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना
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श्लोक 34
श्लोक
12.222.34
प्रह्राद उवाच
आर्जवेनाप्रमादेन प्रसादेनात्मवत्तया।
वृद्धशुश्रूषया शक्र पुरुषो लभते महत् ॥ ३४॥
अनुवाद
प्रह्लाद बोले - इन्द्र ! सरलता, सावधानी, बुद्धि की पवित्रता, मन की स्थिरता और बड़ों की सेवा से मनुष्य महत्त्वपूर्ण पद प्राप्त करता है ॥34॥
Prahlad said – Indra! A man attains an important position by simplicity, caution, purity of intellect, stability of mind and serving elders. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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