Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.222.23: मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि सब कुछ स्वभाव से ही प्राप्त होता है। मेरी आत्मबुद्धि भी इसके विपरीत मत नहीं रखती।॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.222.23 
स्वभावादेव तत्सर्वमिति मे निश्चिता मति:।
आत्मप्रतिष्ठा प्रज्ञा वा मम नास्ति ततोऽन्यथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि सब कुछ स्वभाव से ही प्राप्त होता है। मेरी आत्मबुद्धि भी इसके विपरीत मत नहीं रखती।॥23॥
 
It is my firm belief that everything is attained by nature. Even my subjective intellect does not hold a contrary opinion.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)