श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.222.16 
पुरुषार्थस्य चाभावे नास्ति कश्चिच्च कारक:।
स्वयं न कुर्वतस्तस्य जातु मानो भवेदिह॥ १६॥
 
 
अनुवाद
बिना प्रयत्न के मनुष्य कर्ता नहीं बन सकता; परन्तु कभी कुछ न करने पर भी इस संसार में कर्ता होने का अभिमान करता है ॥16॥
 
Without an effort a man cannot become a doer; but even though he never does anything he becomes proud of being a doer in this world. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)