Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.221.d1: जो व्यक्ति अतिथियों को भोजन कराए बिना भोजन नहीं करता, वह अतिथि-प्रेमी है और जो व्यक्ति देवताओं को भोजन कराए बिना भोजन नहीं करता, वह भगवान का भक्त है।   |   mahabharat अध्याय 12.221: व्रत, तप, उपवास, ब्रह्मचर्य तथा अतिथिसेवा आदिका विवेचन तथा यज्ञशिष्ट अन्नका भोजन करनेवालेको परम उत्तम गतिकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 221: व्रत, तप, उपवास, ब्रह्मचर्य तथा अतिथिसेवा आदिका विवेचन तथा यज्ञशिष्ट अन्नका भोजन करनेवालेको परम उत्तम गतिकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.221.d1 
(अदत्त्वा योऽतिथिभ्योऽन्नं न भुङ्‍क्ते सोऽतिथिप्रिय:।
अदत्त्वान्नं दैवतेभ्यो यो न भुङ्‍क्ते स दैवतम्॥ )
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अतिथियों को भोजन कराए बिना भोजन नहीं करता, वह अतिथि-प्रेमी है और जो व्यक्ति देवताओं को भोजन कराए बिना भोजन नहीं करता, वह भगवान का भक्त है।
 
He who does not eat without offering food to guests is a person who loves guests and he who does not eat without offering food to the gods is a devotee of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)