युधिष्ठिर उवाच
कथं सदोपवासी स्याद् ब्रह्मचारी कथं भवेत्।
विघसाशी कथं च स्यात् सदा चैवातिथिव्रत:॥ ९॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! कोई व्यक्ति प्रतिदिन उपवास कैसे कर सकता है? वह हर समय ब्रह्मचारी कैसे रह सकता है? उसे भोजन किस प्रकार करना चाहिए कि वह सदैव यज्ञ से बचा हुआ अन्न खा सके? और वह हर समय अतिथि सेवा का व्रत कैसे निभा सकता है?"
Yudhishthira asked, "Grandfather! How can a man fast every day? How can he remain celibate all the time? How should he eat food so that he can always eat the food left over from the sacrifices? And how can he keep up the vow of serving guests all the time?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)