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mahabharat 12.221.16: ऐसे पुरुष अक्षयलोक को प्राप्त होते हैं। ब्रह्माजी और अप्सराओं सहित सभी देवता उनके घर आते हैं और उनकी परिक्रमा करते हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.221: व्रत, तप, उपवास, ब्रह्मचर्य तथा अतिथिसेवा आदिका विवेचन तथा यज्ञशिष्ट अन्नका भोजन करनेवालेको परम उत्तम गतिकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 221: व्रत, तप, उपवास, ब्रह्मचर्य तथा अतिथिसेवा आदिका विवेचन तथा यज्ञशिष्ट अन्नका भोजन करनेवालेको परम उत्तम गतिकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.221.16 
तेषां लोका ह्यपर्यन्ता: सदने ब्रह्मणा सह।
उपस्थिताश्चाप्सरोभि: परियान्ति दिवौकस:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऐसे पुरुष अक्षयलोक को प्राप्त होते हैं। ब्रह्माजी और अप्सराओं सहित सभी देवता उनके घर आते हैं और उनकी परिक्रमा करते हैं॥16॥
 
Such men attain Akshayloka. Brahmaji and all the gods including Apsaras come to their house and circumambulate around them.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)