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युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! व्रती द्विजगण वेदों में वर्णित अपने शुभ कर्मों के फल की इच्छा से हविष्यान्न का भोजन करते हैं, उनका यह कर्म उचित है या नहीं?
Yudhishthir asked – Grandfather! The fasting Dwijagans eat the food of Havishyanna with the desire of getting the fruits of their good deeds as mentioned in the Vedas, is this action of theirs justified or not?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥