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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन
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श्लोक d99
श्लोक
12.220.d99
यदि मे व्याहृतं गुह्यं श्रुतं न तु त्वया शुभे॥
तथ्यमित्येव वा शुद्धे ज्ञानं ज्ञानविलोचने।
अनुवाद
शुभ कामनाएँ! शुद्ध स्वरूप! ज्ञान से परिपूर्ण देवी! मैंने तुम्हें जो ब्रह्म का गहन और सच्चा ज्ञान बताया है, क्या तुमने उसके बारे में सुना है या नहीं?
Good luck! In pure form! Goddess full of knowledge! Have you heard about the deep and true knowledge of Brahman that I have told you about or not?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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