Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d95: हे श्रेष्ठ अंगों वाली देवी! कोई भी सांसारिक शब्द निरर्थक नहीं है; फिर वैदिक शब्द भी निरर्थक कैसे हो सकता है? जिन शब्दों में परस्पर कोई बोध न हो, जो एक-दूसरे से असंबंधित हों, उन्हें सांसारिक लोग निरर्थक मानते हैं। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे श्रेष्ठ अंगों वाली देवी! कोई भी सांसारिक शब्द निरर्थक नहीं है; फिर वैदिक शब्द भी निरर्थक कैसे हो सकता है? जिन शब्दों में परस्पर कोई बोध न हो, जो एक-दूसरे से असंबंधित हों, उन्हें सांसारिक लोग निरर्थक मानते हैं।
O Goddess with the best limbs! No worldly word is meaningless; then how can a Vedic word be meaningless. Words which do not have any mutual understanding, which are unrelated to each other, are considered meaningless by worldly people.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥