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mahabharat 12.220.d90: जिस प्रकार एक ही जल में मिट्टी और बीज आदि विशेष पदार्थों के संयोग से भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वाद उत्पन्न होते हैं, उसी प्रकार प्रकृति और आत्मा के संयोग से उनके गुणों और कर्मों के अनुसार नाना प्रकार की सृष्टि प्रकट होती है।   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d90
 
 
श्लोक  12.220.d90 
भूमिसंस्थानयोगेन वस्तुसंस्थानयोगत:।
रसभेदा यथा तोये प्रकृत्यामात्मनस्तथा॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार एक ही जल में मिट्टी और बीज आदि विशेष पदार्थों के संयोग से भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वाद उत्पन्न होते हैं, उसी प्रकार प्रकृति और आत्मा के संयोग से उनके गुणों और कर्मों के अनुसार नाना प्रकार की सृष्टि प्रकट होती है।
 
Just as different types of tastes arise due to the combination of special substances like soil and seeds etc. in the same water, in the same way, due to the combination of nature and soul, various types of creation appear according to their qualities and actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)