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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन
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श्लोक d89
श्लोक
12.220.d89
न च स्त्री न पुमांश्चैव तथैव न नपुंसक:।
केवलज्ञानमात्रं तत् तस्मिन् सर्वं प्रतिष्ठितम्॥
अनुवाद
वह परमात्मा न तो स्त्री है, न पुरुष है, न ही नपुंसक है, वह तो केवल ज्ञानस्वरूप है। यह सम्पूर्ण जगत् उसी के आधार पर स्थित है।
That Supreme Being is neither a woman nor a man nor impotent, He is only the embodiment of knowledge. This entire world is established on His basis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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