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mahabharat 12.220.d88: यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड (समग्र एवं व्यष्टि जगत) उसी परमात्मा में स्थित है। जैसे पृथ्वी पर एक बड़ा और एक छोटा घड़ा स्थित है।   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d88
 
 
श्लोक  12.220.d88 
एतत् प्रपञ्चमखिलं तस्मिन् सर्वं प्रतिष्ठितम्।
महाघटोऽल्पकश्चैव यथा मह्यां प्रतिष्ठितौ॥
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड (समग्र एवं व्यष्टि जगत) उसी परमात्मा में स्थित है। जैसे पृथ्वी पर एक बड़ा और एक छोटा घड़ा स्थित है।
 
This entire universe (the whole and the individual world) is situated in the same Supreme Being. Just like a big and a small pot are situated on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)