श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d85
 
 
श्लोक  12.220.d85 
तमोरश्मिगणश्चैव मेघजालं तथैव च।
वर्षं तारागणं चैव नाकाशं दृश्यते पुन:॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त अंधकार, किरणें, बादल, वर्षा और तारे भी बार-बार दिखाई देते हैं; परन्तु आकाश दिखाई नहीं देता।
 
Besides this, darkness, rays, clouds, rain and stars are also seen repeatedly; but the sky is not visible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)