Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d84: श्वेतकेतु ने कहा - मनुष्य अपनी त्वचा से बार-बार आकाश की वायु को स्पर्श करता है, अपनी नाक से बार-बार आकाश की सुगंध को सूंघता है और अपनी आंखों से आकाश में प्रकाश को देखता है। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्वेतकेतु ने कहा - मनुष्य अपनी त्वचा से बार-बार आकाश की वायु को स्पर्श करता है, अपनी नाक से बार-बार आकाश की सुगंध को सूंघता है और अपनी आंखों से आकाश में प्रकाश को देखता है।
Shvetketu said - Man repeatedly touches the air in the sky through his skin, repeatedly smells the fragrance of the sky through his nose and sees the light in the sky through his eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥