Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d82: वह ब्रह्म परम शुद्ध और अतुलनीय है; इसलिए उसका वर्णन शब्दों से नहीं किया जा सकता। उसे इन भौतिक आँखों से नहीं देखा जा सकता, और मेरा मत है कि उसे ज्ञान-चक्षुओं से ही देखा जा सकता है। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद् ब्रह्म परमं शुद्धमनौपम्यं न शक्यते।
न दृश्यते तथा तच्च दृश्यते च मतिर्मम॥
अनुवाद
वह ब्रह्म परम शुद्ध और अतुलनीय है; इसलिए उसका वर्णन शब्दों से नहीं किया जा सकता। उसे इन भौतिक आँखों से नहीं देखा जा सकता, और मेरा मत है कि उसे ज्ञान-चक्षुओं से ही देखा जा सकता है।
That Brahma is absolutely pure and without comparison; hence it cannot be described by words. It cannot be seen by these physical eyes and it is my opinion that it can be realized by the eye of knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥