Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d81: जगत का ब्रह्म से संबंध होने के कारण यह ब्रह्म का कार्य प्रतीत होता है। जिस प्रकार समस्त जगत आकाश से पृथक है, फिर भी उसके विकारों से संबंध होने के कारण वह सदैव उसमें ही मिला हुआ है। उसी प्रकार, यद्यपि ब्रह्म का जगत से कोई संबंध नहीं है, फिर भी उत्पत्ति के कारण वह ब्रह्म के समान ही माना जाता है। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संसर्गे सति सम्बन्धात् तद् विकारं भविष्यति।
अनाकाशगतं सर्वं विकारे च सदा गतम्॥
अनुवाद
जगत का ब्रह्म से संबंध होने के कारण यह ब्रह्म का कार्य प्रतीत होता है। जिस प्रकार समस्त जगत आकाश से पृथक है, फिर भी उसके विकारों से संबंध होने के कारण वह सदैव उसमें ही मिला हुआ है। उसी प्रकार, यद्यपि ब्रह्म का जगत से कोई संबंध नहीं है, फिर भी उत्पत्ति के कारण वह ब्रह्म के समान ही माना जाता है।
The relation of the world with Brahman makes it appear to be the work of Brahman. Just as the entire world is separate from the sky, yet it is always mixed with it due to its relation with its disorders. Similarly, even though Brahman has no connection with the world, yet it is considered to be like him due to its origin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥