श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  12.220.d8 
पितोवाच
न शक्यं प्रार्थितं वत्से त्वयाद्य प्रतिभाति मे।
अन्धतानन्धता चेति विकारो मम जायते॥
उन्मत्तेवाशुभं वाक्यं भाषसे शुभलोचने।
 
 
अनुवाद
पिता ने कहा, "बेटी! मुझे नहीं लगता कि तुम्हारी प्रार्थना पूरी हो सकती है, क्योंकि एक ही व्यक्ति अंधा भी हो सकता है और अंधा भी नहीं? मुझे तुम्हारी यह बात सुनकर दुःख हुआ। शुभलोचना! तुम पागल हो गई हो और बुरी बातें कह रही हो।"
 
The father said, "Daughter! I don't think that your prayer can be fulfilled because how is it possible for the same person to be blind and also not blind? I feel sad to hear this from you. Shubhlochane! You have become crazy and are saying bad things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)