श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d79
 
 
श्लोक  12.220.d79 
अहं त्वमेतदित्येव परे संकल्पना मया।
तस्माद् वाचो न वर्तन्त इति नैव विरुध्यते॥
 
 
अनुवाद
मैं', 'तू' और 'यह' - ये सभी नाम परब्रह्म के लिए हमारे द्वारा कल्पित हैं (ये वास्तविक नहीं हैं), इसलिए श्रुति के इस कथन में कोई विरोधाभास नहीं है कि 'वाणी उस परब्रह्म तक नहीं पहुँच सकती'।
 
'I', 'you' and 'this' - all these names are imagined by us for the Supreme Brahman (they are not real), hence there is no contradiction in the statement of Shruti that 'speech cannot reach that Supreme Being'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)