Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d76: सुवर्चला ने कहा - यह 'अहम्' शब्द सदैव आत्मा के अर्थ में स्पष्ट रूप से प्रयुक्त होता है; किन्तु 'यतो वाचो निवर्तन्ते' श्रुति के अनुसार वहाँ वाणी की पहुँच नहीं है; अतः आत्मा के लिए 'अहं' शब्द का प्रयोग भी मिथ्या होगा। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुवर्चलोवाच
सदाहङ्कारशब्दोऽयं व्यक्तमात्मनि संश्रित:।
न वाचस्तत्र वर्तन्ते इति मिथ्या भविष्यति॥
अनुवाद
सुवर्चला ने कहा - यह 'अहम्' शब्द सदैव आत्मा के अर्थ में स्पष्ट रूप से प्रयुक्त होता है; किन्तु 'यतो वाचो निवर्तन्ते' श्रुति के अनुसार वहाँ वाणी की पहुँच नहीं है; अतः आत्मा के लिए 'अहं' शब्द का प्रयोग भी मिथ्या होगा।
Suvarchala said – This word ‘Aham’ is always clearly used in the meaning of soul; But according to the shruti ‘Yato Vaacho Nivartante’ there is no access to speech there; Therefore, the use of the term ‘ego’ for the soul would also be false.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥