Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d74: सुवर्चला ने कहा, "शब्द का आधार अर्थात् वेद ही ईश्वर है जो अर्थ का स्रोत है। विद्वानों ने यही कहा है और मेरा भी यही मत है। उस अर्थ के आधार के बिना शब्द टिक नहीं सकता। किन्तु आप उनके बीच कोई निश्चित संबंध नहीं मानते, अतः आपका कथन यश के प्रतिकूल है।" | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुवर्चलोवाच
शब्दस्थानोऽत्र इत्युक्तस्तथार्थ इति मे कृतम्।
अर्थास्थितो न तिष्ठेच्च विरूढमिह भाषितम्॥
अनुवाद
सुवर्चला ने कहा, "शब्द का आधार अर्थात् वेद ही ईश्वर है जो अर्थ का स्रोत है। विद्वानों ने यही कहा है और मेरा भी यही मत है। उस अर्थ के आधार के बिना शब्द टिक नहीं सकता। किन्तु आप उनके बीच कोई निश्चित संबंध नहीं मानते, अतः आपका कथन यश के प्रतिकूल है।"
Suvarchala said, "The basis of the word i.e. the Vedas is the God who is the source of meaning. This is what the scholars have said and this is my opinion too. Without the basis of that meaning, the word cannot stand. But you do not believe in any fixed relation between them, hence your statement is contrary to fame."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥