Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.220.d73: श्वेतकेतु ने कहा - शब्द और उसके अर्थ के बीच एक संबंध है और वह संबंध शाश्वत है। यदि कोई शब्द है तो उसका अर्थ सदैव बना रहता है। विपरीत क्रम में उच्चारित होने पर भी शब्द का कोई न कोई अर्थ अवश्य रहता है (जैसे नदी, धर्म आदि)।   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d73
 
 
श्लोक  12.220.d73 
श्वेतकेतुरुवाच
स संसर्गोऽतिमात्रस्तु वाचकत्वेन वर्तते।
अस्ति चेद् वर्तते नित्यं विकारोच्चारणेन वै॥
 
 
अनुवाद
श्वेतकेतु ने कहा - शब्द और उसके अर्थ के बीच एक संबंध है और वह संबंध शाश्वत है। यदि कोई शब्द है तो उसका अर्थ सदैव बना रहता है। विपरीत क्रम में उच्चारित होने पर भी शब्द का कोई न कोई अर्थ अवश्य रहता है (जैसे नदी, धर्म आदि)।
 
Shvetketu said – There is a relation between the word and its meaning and that relation is eternal. If there is a word then its meaning is always there. Even when pronounced in the opposite order, the word still has some meaning (like river, religion etc.).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)