श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d71
 
 
श्लोक  12.220.d71 
श्वेतकेतुरुवाच
शब्दार्थयोर्न चैवास्ति सम्बन्धोऽत्यन्त एव हि।
पुष्करे च यथा तोयं तथास्तीति च वेत्थ तत् ॥
 
 
अनुवाद
श्वेतकेतु बोले - शब्द और अर्थ में कोई निश्चित संबंध नहीं है। कमल के पत्ते पर जल की तरह शब्द और अर्थ में भी अटल संबंध है, यह जान लो।
 
Shvetketu said – There is no fixed relationship between word and meaning. Like the water on a lotus leaf, there is an invariable relationship between word and meaning, know this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)