Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d69: श्वेतकेतु बोले - आकार आदि वर्णों के समूह का क्रम से या रुक-रुक कर उच्चारण करने पर जो वस्तु प्रकट होती है, उसे 'शब्द' जानना चाहिए और उस शब्द से जो अर्थ बोध होता है, उसे 'अर्थ' कहते हैं। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्वेतकेतुरुवाच
व्यत्ययेन च वर्णानां परिवादकृतो हि य:।
स शब्द इति विज्ञेयस्तन्निपातोऽर्थ उच्यते॥
अनुवाद
श्वेतकेतु बोले - आकार आदि वर्णों के समूह का क्रम से या रुक-रुक कर उच्चारण करने पर जो वस्तु प्रकट होती है, उसे 'शब्द' जानना चाहिए और उस शब्द से जो अर्थ बोध होता है, उसे 'अर्थ' कहते हैं।
Shvetketu said - The thing that appears when the group of alphabets like Aakar etc. is pronounced sequentially or intermittently, should be known as 'word' and the meaning that is felt from that word is called 'Artha'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥