श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d68
 
 
श्लोक  12.220.d68 
सुवर्चलोवाच
शब्द: कोऽत्र इति ख्यातस्तथार्थश्च महामुने।
आकृत्यापि तयोर्ब्रूहि लक्षणेन पृथक् पृथक्॥
 
 
अनुवाद
सुवर्चला ने पूछा- महामुनि! यहाँ शब्द किसे कहा गया है और उसका अर्थ क्या है? कृपया उनके आकार और लक्षण बताकर उनका अलग-अलग वर्णन कीजिए।
 
Suvarchala asked- Mahamuni! What is being called word here and what is its meaning? Please describe them separately by indicating their shape and characteristics.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)