श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d67
 
 
श्लोक  12.220.d67 
भगवत्या तथा लोके रक्षितव्यं न संशय:।
मर्यादालोकरक्षार्थमेवमस्मि तथा स्थित:॥
 
 
अनुवाद
देवी! आपको भी संसार की रक्षा के लिए लोक-व्यवस्था का पालन करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं भी लोक-मर्यादा की रक्षा में इसी भावना से स्थित हूँ।
 
Goddess! You too should follow public order to save the world. There is no doubt in it. I am also situated in the same spirit in protecting public dignity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)