Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d64-d65: भगवान नारायण स्वयं कहते हैं कि 'जो पुरुष मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील है, वह अत्यन्त गहन गुफा में रहकर ज्ञानरूपी तलवार से जन्म-मरण के बन्धनों को काटकर मेरे धाम को जाता है, वही विद्वान् है और मुझे प्रिय है। वह योगी पुरुष मैं ही हूँ। इसमें संशय नहीं है', यह भगवान का वचन है। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सुगह्वरे मुक्तो यत्र मे तद्भवाभवम्।
छित्त्वा ज्ञानासिना गच्छेत् स विद्वान् स च मे प्रिय:॥
सोऽहमेव न संदेह: प्रतिज्ञा इति तस्य वै॥
अनुवाद
भगवान नारायण स्वयं कहते हैं कि 'जो पुरुष मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील है, वह अत्यन्त गहन गुफा में रहकर ज्ञानरूपी तलवार से जन्म-मरण के बन्धनों को काटकर मेरे धाम को जाता है, वही विद्वान् है और मुझे प्रिय है। वह योगी पुरुष मैं ही हूँ। इसमें संशय नहीं है', यह भगवान का वचन है।
Lord Narayana himself says that 'The person who is industrious for attaining salvation, stays in a very deep cave and cuts the shackles of birth and death with the sword of knowledge and goes to my abode, he is the learned person and he is dear to me. That Yogi man is me. There is no doubt in this', this is the promise of God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥