Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d58-d59: सुवर्चला बोली, "ब्रह्मर्षि! इतने प्रकार के विरोध से क्या लाभ? इन नाना प्रकार के कार्यों में निरन्तर लगे रहने से आपका ज्ञान नष्ट हो रहा है। अतः हे महाज्ञानी! कृपया मुझे इसका कारण बताइए, क्योंकि मैं आपका अनुसरण करने जा रही हूँ।" | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुवर्चला बोली, "ब्रह्मर्षि! इतने प्रकार के विरोध से क्या लाभ? इन नाना प्रकार के कार्यों में निरन्तर लगे रहने से आपका ज्ञान नष्ट हो रहा है। अतः हे महाज्ञानी! कृपया मुझे इसका कारण बताइए, क्योंकि मैं आपका अनुसरण करने जा रही हूँ।"
Suvarchala said, "Brahmarshi! What is the use of so many types of opposition? Your knowledge is getting lost by always getting involved in these various activities. Therefore, O great wise one! Please tell me the reason for this, because I am going to follow you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥