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mahabharat 12.220.d57: हे मनुष्यों के स्वामी! तब धर्मपत्नी सुवर्चला अत्यन्त प्रसन्न हुईं और मुस्कुराकर ये समयानुकूल वचन कहने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d57
 
 
श्लोक  12.220.d57 
तत: प्रहस्य सा हृष्टा भर्तारं धर्मचारिणी।
उवाच वचनं काले स्मयमाना तदा नृप॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तब धर्मपत्नी सुवर्चला अत्यन्त प्रसन्न हुईं और मुस्कुराकर ये समयानुकूल वचन कहने लगीं।
 
Lord of men! Then the virtuous wife Suvarchala became very happy. She smiled and said these timely words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)