Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d55-d56: आत्मा में 'अहम्' (मैं हूँ) का भाव स्थापित हो गया है। वही भाव आपमें भी है। आप भी अहंकार हैं, मैं भी अहंकार हूँ और ये सब अहंकार का ही एक रूप है। इसमें कोई परम सत्य नहीं है, फिर आप क्यों पूछते हैं? | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मा में 'अहम्' (मैं हूँ) का भाव स्थापित हो गया है। वही भाव आपमें भी है। आप भी अहंकार हैं, मैं भी अहंकार हूँ और ये सब अहंकार का ही एक रूप है। इसमें कोई परम सत्य नहीं है, फिर आप क्यों पूछते हैं?
‘The feeling of ‘Aham’ (I am) has been established in the soul. The same feeling exists in you too. You are also ego, I am also ego and all this is a form of ego. There is no ultimate truth in this; then why do you ask?’
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥