Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d54: यह सुनकर श्वेतकेतु ने उससे कहा - 'भामिनी! वह कुछ नहीं कहेगा। यदि तुम यह मानती हो कि आत्मा नाम और कुल से संबंधित है, तो यह तुम्हारी मिथ्या धारणा है; क्योंकि नाम और कुल होने पर मनुष्य शरीर से बंध जाता है।' | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तच्छ्रुत्वा प्रत्युवाचैनां स न वक्ष्यति भामिनि।
नामगोत्रसमायुक्तमात्मानं मन्यसे यदि।
तन्मिथ्या गोत्रसद्भावे वर्तते देहबन्धनम्॥
अनुवाद
यह सुनकर श्वेतकेतु ने उससे कहा - 'भामिनी! वह कुछ नहीं कहेगा। यदि तुम यह मानती हो कि आत्मा नाम और कुल से संबंधित है, तो यह तुम्हारी मिथ्या धारणा है; क्योंकि नाम और कुल होने पर मनुष्य शरीर से बंध जाता है।'
Hearing this, Swetaketu said to her - 'Bhamini! He will not say anything. If you believe that the soul is associated with name and lineage, then this is your false notion; because on having name and lineage, one gets bound to the body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥