श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  12.220.d46 
अहमित्येव भावेन स्थितोऽहं त्वं तथैव च।
तस्मात् कर्माणि कुर्वीथा: कुर्यां ते च तत: परम्॥
 
 
अनुवाद
मैं इसी अवस्था में स्थित हूँ। तुम भी इसी अवस्था में स्थित रहो, अतः मेरे कहे अनुसार सब कार्य करो, फिर मैं भी तुम्हारा प्रिय कार्य करूँगा।
 
I am situated in this state. You also remain situated in this state, therefore do all the work according to my instructions, then I will also do your favourite work.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)