श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d45
 
 
श्लोक  12.220.d45 
श्वेतकेतुरुवाच
यानि चोक्तानि वेदेषु तत् सर्वं कुरु शोभने।
मया सह यथान्यायं सहधर्मचरी मम॥
 
 
अनुवाद
श्वेतकेतु ने कहा- शोभने! मेरे साथ रहो और वेदविहित समस्त शुभ कर्मों को विधिपूर्वक करो तथा सच्चे मन से मेरे सहधर्मी बनो।
 
Shvetketu said-Shobne! Stay with me and perform all the auspicious deeds prescribed in the Vedas in a proper manner and truly become my co-religionist.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)