Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d41: देवल ने कहा—वर रूप में विराजमान भगवान लक्ष्मीपति प्रसन्न हों। मेरी यह पुत्री उन्हें पत्नी रूप में समर्पित है। प्रभु! मैं अपनी यह पुत्री आपको एक सुयोग्य जीवनसाथी के रूप में दे रहा हूँ। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवल उवाच
प्रीयतां माधवो देव: पत्नी चेयं सुता मम।
प्रतिपादयामि ते कन्यां सहधर्मचरीं शुभाम्॥
अनुवाद
देवल ने कहा—वर रूप में विराजमान भगवान लक्ष्मीपति प्रसन्न हों। मेरी यह पुत्री उन्हें पत्नी रूप में समर्पित है। प्रभु! मैं अपनी यह पुत्री आपको एक सुयोग्य जीवनसाथी के रूप में दे रहा हूँ।
Deval said—May Lord Lakshmipati, who is seated in the form of a groom, be pleased. This daughter of mine is dedicated to him as his wife. Prabhu! I am giving this daughter of mine to you as a benevolent life partner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥