श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  12.220.d38 
भीष्म उवाच
तद् विज्ञाय पिता तस्या देवलो मुनिसत्तम:।
श्वेतकेतुं च सम्पूज्य तथैवोद्दालकेन तम्॥
मुनीनामग्रत: कन्यां प्रददौ जलपूर्वकम्।
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! यह सब घटना जानकर सुवर्चला के पिता महामुनि देवल ने उद्दालक सहित श्वेतकेतु का पूजन करके ऋषियों के समक्ष प्रतिज्ञा की और अपनी पुत्री श्वेतकेतु को दे दी।
 
Bhishma says - King! After knowing all these events, the great sage Devala, father of Suvarchala, after worshipping Swetaketu along with Uddalaka, made a vow in front of the sages and gave his daughter to Swetaketu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)