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mahabharat 12.220.d37: सुवर्चला बोली, "विद्वान! मैंने आपको हृदय से वरण किया है। मेरे पिता ही हैं जिन्होंने शास्त्रों में वर्णित शेष कार्यों को पूर्ण किया है। आप मुझे उनसे माँग सकते हैं। यही वेदों द्वारा निर्दिष्ट आचार संहिता है।"   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d37
 
 
श्लोक  12.220.d37 
सुवर्चलोवाच
मनसासि वृतो विद्वन् शेषकर्ता पिता मम।
वृणीष्व पितरं मह्यमेष वेदविधिक्रम:॥
 
 
अनुवाद
सुवर्चला बोली, "विद्वान! मैंने आपको हृदय से वरण किया है। मेरे पिता ही हैं जिन्होंने शास्त्रों में वर्णित शेष कार्यों को पूर्ण किया है। आप मुझे उनसे माँग सकते हैं। यही वेदों द्वारा निर्दिष्ट आचार संहिता है।"
 
Suvarchala said, 'Scholar! I have chosen you from my heart. My father is the one who has completed the remaining tasks mentioned in the scriptures. You can ask for me from him. This is the code of conduct prescribed by the Vedas.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)