Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d32-d33: वह परम पुरुष जिनकी उपस्थिति में यह समस्त ब्रह्माण्ड संचालित होता है। जिन आँखों से यह ब्रह्माण्ड देखता है, जिन कानों से यह सुनता है, जिन त्वचा से यह स्पर्श करता है, जिन नासिका से यह सूँघता है, जिन जिह्वा से यह स्वाद लेता है और जिन सांसारिक नेत्रों से यह समस्त क्रियाएँ करता है, उनसे मेरा कोई संबंध नहीं है। इसीलिए मैं अंधा हूँ। अतः हे महापुरुष, कृपया मुझे स्वीकार करें।' | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह परम पुरुष जिनकी उपस्थिति में यह समस्त ब्रह्माण्ड संचालित होता है। जिन आँखों से यह ब्रह्माण्ड देखता है, जिन कानों से यह सुनता है, जिन त्वचा से यह स्पर्श करता है, जिन नासिका से यह सूँघता है, जिन जिह्वा से यह स्वाद लेता है और जिन सांसारिक नेत्रों से यह समस्त क्रियाएँ करता है, उनसे मेरा कोई संबंध नहीं है। इसीलिए मैं अंधा हूँ। अतः हे महापुरुष, कृपया मुझे स्वीकार करें।'
‘The Supreme Being in whose presence this entire universe functions. I have no relation with the eyes through which this universe sees, ears through which it hears, skin through which it touches, nose through which it smells, tongue through which it tastes and the worldly eye through which it carries out all this activity. That is why I am blind. Therefore, O noble one, please accept me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥