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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन
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श्लोक d27
श्लोक
12.220.d27
कन्ये एष महाभागे प्राप्तो ऋषिकुमारक:।
वरयैनं महाप्राज्ञं वेदवेदाङ्गपारगम्॥
अनुवाद
"हे कन्या! ये ऋषि कुमार श्वेतकेतु आए हैं। ये वेद-वेदांगों के प्रकांड विद्वान और पारंगत विद्वान हैं। तुम इन्हें चुन लो।"
'Very fortunate girl! This sage Kumar Shwetaketu has come. He is a great scholar and an expert scholar of Vedas and Vedangas. You select them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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