श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  12.220.d26 
उद्दालकसुतं दृष्ट्वा श्वेतकेतुं महाव्रतम्।
यथान्यायं च सम्पूज्य देवल: प्रत्यभाषत॥
 
 
अनुवाद
उद्दालक के पुत्र महाभक्त श्वेतकेतु को आते देख देवल ने उनकी विधिपूर्वक पूजा की और अपनी पुत्री से कहा -
 
Seeing Uddalaka's son, the great devotee Swetaketu coming, Devala worshipped him appropriately and said to his daughter -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)