Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d23-d25: तत्पश्चात किसी समय विद्वान्, ब्राह्मणभक्त, न्याय में निपुण, प्रणय-क्रीड़ा में कुशल, ब्रह्मचर्य से परिपूर्ण, वेदों के ज्ञाता, वेदों के ज्ञाता, कर्मकाण्ड के विशेषज्ञ, विवेक से आत्मा के तत्त्व को जानने वाले, जीवित पिता वाले और गुणों के सागर ऋषि श्वेतकेतु ने सारी कथा सुनकर शीघ्रता से उस कन्या को प्राप्त करने के लिए देवल ऋषि के पास आदरपूर्वक आये। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात किसी समय विद्वान्, ब्राह्मणभक्त, न्याय में निपुण, प्रणय-क्रीड़ा में कुशल, ब्रह्मचर्य से परिपूर्ण, वेदों के ज्ञाता, वेदों के ज्ञाता, कर्मकाण्ड के विशेषज्ञ, विवेक से आत्मा के तत्त्व को जानने वाले, जीवित पिता वाले और गुणों के सागर ऋषि श्वेतकेतु ने सारी कथा सुनकर शीघ्रता से उस कन्या को प्राप्त करने के लिए देवल ऋषि के पास आदरपूर्वक आये।
Thereafter, at some time, sage Shvetketu, a learned man, a devotee of Brahmins, an expert in justice, skilled in courting, full of celibacy, an expert on the Vedas, an expert on Vedas, an expert in rituals, a person who knows the soul's essence with discretion, having a living father and an ocean of virtues, after hearing the whole story, Rishi Shvetketu quickly came with respect to Deval Rishi to get the girl.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥