Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d21-d22: वे नाना देशों में रहने वाले महर्षि क्रोधित होकर जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से मन ही मन देवल ऋषि की निन्दा करते हुए लौट गये और वह अभिमानी कन्या अपने पिता के घर में ही रह गयी। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुत्सयित्वा मुनिं तत्र मनसा मुनिसत्तमा:॥
यथागतं ययु: क्रुद्धा नानादेशनिवासिन:।
कन्या च संस्थिता तत्र पितृवेश्मनि भामिनी॥
अनुवाद
वे नाना देशों में रहने वाले महर्षि क्रोधित होकर जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से मन ही मन देवल ऋषि की निन्दा करते हुए लौट गये और वह अभिमानी कन्या अपने पिता के घर में ही रह गयी।
Those great sages residing in various countries became angry and went back the same way they had come, criticizing the sage Deval in their hearts, and that proud girl remained there in her father's house.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥