श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  12.220.d20 
तच्छ्रुत्वा मुनयस्तत्र वीक्षमाणा: परस्परम्।
नोचुर्विप्रा महाभागा: कन्यां मत्वा ह्यवेदिकाम्॥
 
 
अनुवाद
कन्या की यह बात सुनकर सभी ऋषिगण एक-दूसरे का मुँह देखने लगे। उन सौभाग्यशाली ब्राह्मणों ने कन्या को निर्दोष जानकर कुछ नहीं कहा।
 
Hearing this from the girl, all the sages started looking at each other. Those fortunate Brahmins did not say anything knowing that the girl was innocent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)