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mahabharat 12.220.d16-d17: पुत्री! यहाँ आए ये ऋषिगण वेद-वेदांगों में पारंगत, उत्तम एवं सदाचारी हैं। ये मुझे अपने पुत्रों के समान प्रिय हैं। हे प्रिये! इन लोगों में से आज ही उस महापुण्यवान ऋषिकुमार का चयन करो जिसे तुम अपना पति बनाना चाहती हो, शुभ! मैं उसी से तुम्हारा विवाह करा दूँगी।'   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d16-d17
 
 
श्लोक  12.220.d16-d17 
एतेऽपि मुनयो वत्से स्वपुत्रैकमता इह।
वेदवेदाङ्गसम्पन्ना: कुलीना: शीलसम्मता:॥
येऽमी तेषु वरं भद्रे त्वमिच्छसि महाव्रतम्।
तं कुमारं वृणीष्वाद्य तस्मै दास्याम्यहं शुभे॥
 
 
अनुवाद
पुत्री! यहाँ आए ये ऋषिगण वेद-वेदांगों में पारंगत, उत्तम एवं सदाचारी हैं। ये मुझे अपने पुत्रों के समान प्रिय हैं। हे प्रिये! इन लोगों में से आज ही उस महापुण्यवान ऋषिकुमार का चयन करो जिसे तुम अपना पति बनाना चाहती हो, शुभ! मैं उसी से तुम्हारा विवाह करा दूँगी।'
 
‘Daughter! These sages who have come here are well versed in the Vedas and Vedangas, are of noble and virtuous character. They are dear to me like my own sons. O dear one! Choose today the great virtuous Rishikumar from amongst these people whom you want to make your husband, Shubh! I will get you married to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)