श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  12.220.d15 
अनुमान्य यथान्यायं मुनीन् मुनिकुमारकान्।
अभ्यर्च्य विधिवत् तत्र कन्यामाह पिता महान्॥
 
 
अनुवाद
कन्या के पिता देवल ने वहाँ आये हुए ऋषियों और उनके पुत्रों का यथोचित आदर और पूजन करके अपनी पुत्री से कहा-
 
The great father of the girl, Devala, after paying due respect and worshipping the sages and their sons who had come there in a proper manner, said to his daughter-
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)