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mahabharat 12.220.d105: नरेश्वर! आपके प्रश्न के उत्तर में मैंने यह घटना कही है। इस प्रकार पति-पत्नी दोनों ने गृहस्थ धर्म का आश्रय लेकर भगवान को प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक d105
 
 
श्लोक  12.220.d105 
एतत् ते कथितं राजन् यस्मात् त्वं परिपृच्छसि।
गार्हस्थ्यं च समाधाय गतौ जायापती परम्॥ )
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! आपके प्रश्न के उत्तर में मैंने यह घटना कही है। इस प्रकार पति-पत्नी दोनों ने गृहस्थ धर्म का आश्रय लेकर भगवान को प्राप्त किया।
 
Nareshwar! I have narrated this incident in answer to the question you asked. In this way both the husband and wife, taking shelter of the household religion, attained God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)