Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.d103-d104: श्वेतकेतु अपनी पत्नी को साथ रखकर नित्यकर्म में संलग्न रहते थे। वे अपने समस्त कर्मों को सबके हृदय में निवास करने वाले महान भगवान गोविन्द को समर्पित कर उनके ध्यान में लीन रहते थे। राजन! इस प्रकार दीर्घकाल तक भगवान का चिंतन करते हुए उन्हें परमपद की प्राप्ति हुई। | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भर्ता च तामनुप्रेक्ष्य नित्यनैमित्तिकान्वित:।
परमात्मनि गोविन्दे वासुदेवे महात्मनि॥
समाधाय च कर्माणि तन्मयत्वेन भावित:।
कालेन महता राजन् प्राप्नोति परमां गतिम्॥
अनुवाद
श्वेतकेतु अपनी पत्नी को साथ रखकर नित्यकर्म में संलग्न रहते थे। वे अपने समस्त कर्मों को सबके हृदय में निवास करने वाले महान भगवान गोविन्द को समर्पित कर उनके ध्यान में लीन रहते थे। राजन! इस प्रकार दीर्घकाल तक भगवान का चिंतन करते हुए उन्हें परमपद की प्राप्ति हुई।
Shvetketu used to engage in daily routine activities keeping his wife with him. He dedicated all his deeds to the great God Govinda who resides in everyone's heart and remained absorbed in his meditation. Rajan! In this way, by thinking about God for a long time, he attained the supreme state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥